समाज सेवा केवल सहायता नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और संवेदना का प्रतीक है। जब समाज के लोग एक-दूसरे के सहयोग के लिए आगे आते हैं, तब एक सशक्त, संगठित और आत्मनिर्भर समाज का निर्माण होता है। सेवा भाव ही सामाजिक एकता की नींव है।
समाज सेवा केवल सहायता नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और संवेदना का प्रतीक है। जब समाज के लोग एक-दूसरे के सहयोग के लिए आगे आते हैं, तब एक सशक्त, संगठित और आत्मनिर्भर समाज का निर्माण होता है। सेवा भाव ही सामाजिक एकता की नींव है।